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डॉ राम मनोहर लोहिया

DR. RAM MANOHAR LOHIA

डॉ राम मनोहर लोहिया- महान समाजवादी चिंतक

स्वतंत्र भारत की राजनीति और चिंतन धारा पर जिन गिने-चुने लोगों के व्यक्तित्व का गहरा असर हुआ है, उनमें डॉ. राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण प्रमुख रहे हैं। भारत के स्वतंत्रता युद्ध के आखिरी दौर में दोनों की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण रही है। अगर जयप्रकाश नारायण ने देश की राजनीति को स्वतंत्रता के बाद बदला तो वहीं राम मनोहर लोहिया ने देश की राजनीति में भावी बदलाव की बयार आजादी से पहले ही ला दी थी। अपनी प्रखर देशभक्ति और तेजस्‍वी समाजवादी विचारों के कारण वह अपने समर्थकों के साथ ही अपने विरोधियों के मध्‍य भी अपार सम्मान हासिल किया।

डॉ राम मनोहर लोहिया का जन्म उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में स्थित तमसा नदी के किनारे बसे कस्बे अकबरपुर में 23 मार्च, 1910 को हुआ। उनके पिताश्री का नाम हीरालाल था जो की अध्यापक थे और राष्ट्रभक्त भी थे साथ ही गाँधी जी के अनुयायी थे। और उनकी माता जी का नाम श्रीमती चन्दा देवी था वो भी एक शिक्षिका थीं। उनके पिता जी जब गांधी जी से मिलने जाते तो राम मनोहर को भी अपने साथ ले जाया करते थे। इसके कारण गांधीजी के विराट व्यक्तित्व का उन पर गहरा असर हुआ। पिताजी के साथ 1918 में अहमदाबाद कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार शामिल हुए।

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अगस्‍त 1942 को महात्‍मा गांधी ने भारत छोडो़ आंदोलन का ऐलान किया जिसमें उन्होंने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और संघर्ष के नए शिखरों को छुआ। जयप्रकाश नारायण और डॉ. लोहिया हजारीबाग जेल से फरार हुए और भूमिगत रहकर आंदोलन का शानदार नेतृत्‍व किया। लेकिन अंत में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फिर 1946 में उनकी रिहाई हुई। 1946-47 के वर्ष लोहिया जी की जिंदगी के अत्‍यंत निर्णायक वर्ष रहे। आजादी के समय उनके और पंडित जवाहर लाल नेहरु में कई मतभेद पैदा हो गए थे, जिसकी वजह से दोनों के रास्ते अलग हो गए। बाद के दिनों में 12 अक्टूबर 1967 को लोहिया का 57 वर्ष की आयु में देहांत हो गया।

डॉ. लोहिया मानव की स्थापना के पक्षधर समाजवादी थे। वह समाजवादी भी इस अर्थ में थे कि, समाज ही उनका कार्यक्षेत्र था और वह अपने कार्यक्षेत्र को जनमंगल की अनुभूतियों से महकाना चाहते थे। वह चाहते थे कि व्यक्ति-व्यक्ति के बीच कोई भेद, कोई दुराव और कोई दीवार न रहे। सब जन समान हो, सब जन का मंगल हो। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया जी के सपने को जीवित रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है। समय के साथ समाजवादी विचारधारा भी निरंतर आगे बढ़ती रहे यही सपना था महान समाजवादी चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया जी का।

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