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रामशरण दास

RAMSHARAN DAS

वरिष्ठ समाजवादी नेता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोहिया के अनुयायी कहे जाने वाले रामशरण दास उस सियासी जमात के आखिरी लोगों में थे जिन्होंने देश और समाज की बेलौस खिदमत की लेकिन अपने लिए एक अदद आशियाना भी न बना सके। रामशरण दास जी ईमानदारी, सतत संघर्ष एवं समाजवाद की जीवन प्रतिमा थे. वे बाल्यावस्था में लोहिया और समाजवाद से जुड़े तथा जीवनपर्यन्त समाजवाद के कंटकाकीर्ण पथ पर चलते रहे।

श्री रामशरण दास जी का जन्म 03 जुलाई 1927 और महाप्रयाण 21 नवम्बर 2008 को हुआ था। वे जीवनपर्यन्त समाजवादी आंदोलन और विचारधारा के प्रति समर्पित रहेे। श्री दास दो बार कैबिनेट मंत्री, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, एम०एल०ए० और एम०एल०सी० एवं सपा के 16 साल प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्होंने पूरा जीवन समाजवादी आन्दोलन को मजबूत करने में लगा दिया।

आपको बता दें कि रामशरण दास जी की ही गवाही पर इंदिरा जी के खिलाफ फैसला हुआ। वे ऐसे समाजवादी थे जो कभी अन्याय के आगे झुके नहीं, बड़े से बड़े पद का लोभ भी उन्हें कर्तव्यपथ से डिगा नहीं सका। उन्होंने आपातकाल का विरोध किया और कारागार की यातना सही। 05 नवम्बर 1992 को समाजवादी पार्टी के गठन के बाद उनकी सादगी, त्याग और समर्पणभाव को देखते हुए उन्हें सपा का पहला प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, और फिर वे आजीवन इस पद पर बने रहे. रामशरण दास लोहिया की ‘‘सप्तक्रांति’’ ‘‘विकेन्द्रीयकरण’’ ‘‘दाम बांधो’’ ‘‘सामंती भाषा हटाओ’’ ‘‘नदियां साफ करो’’ जैसी अवधारणाओं में गहरी आस्था रखते थे. वे कहा करते थे कि “साम्प्रदायिकता समाज का सबसे बड़ा शत्रु और कैंसर है जिसे जड़ से नष्ट किए बिना देश का भला नहीं होगा। साम्प्रदायिकता को ध्वस्त करना ही समाजवादियों का मूल कर्तव्य है।”

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