Leadership

शिवपाल सिंह यादव

shiv pal singh yadav

श्री शिवपाल सिंह यादव जी का जन्म 6 अप्रैल 1955 को सैफई, इटावा जिला में हुआ था। सन् 1955 को बसंत पंचमी के पावन दिन में पिता सुघर सिंह तथा माता मूर्ति देवी के कनिष्ठ पुत्र के रूप में जन्मे शिवपाल सिंह यादव को मानवता के प्रति उदात्त भाव विरासत में मिला। उन्होंने जनसंघर्षों में भाग लिया और बेहतर नेतृत्व की कला सीखी। इनके पिता स्वर्गीय सुधर सिंह अत्यंत सरल हृदय एवं कर्मठ किसान थे एवं माता स्वर्गीय श्रीमती मूर्ती देवी एक कुशल गृहणी थीं। मार्च 2017 में सम्पन्न हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में वे इटावा जिले के जसवन्तनगर विधान सभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गये।

ये मायावती सरकार के कार्यकाल में 5 मार्च 2012 तक प्रतिपक्ष के नेता भी रहे। अगस्त 2018 में शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाने का ऐलान किया। इसके साथ ही तमाम बड़े नेताओं ने समाजवादी पार्टी को छोड़ प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का अर्थ समय के साथ निरंतर समाज की भलाई के बारे में सोचना है।

शिक्षा

शिवपाल सिंह यादव ने गांव की प्राथमिक पाठशाला से पूर्व माध्यमिक शिक्षा उत्तम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके पश्चात् हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट की शिक्षा के लिए जैन इण्टर कॉलेज करहल, मैनपुरी में प्रवेश लिया। जहाँ से उन्होंने सन् 1972 में हाईस्कूल तथा सन् 1974 में इण्टरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। तत्पश्चात् शिवपाल सिंह यादव ने स्नातक की पढ़ाई सन् 1976 में के०के०डिग्री कॉलेज इटावा (कानपुर विश्वविद्यालय) तथा सन् 1977 में लखनऊ विश्वविद्यालय से बी०पी०एड० की शिक्षा प्राप्त की।

परिवार

शिवपाल सिंह यादव का विवाह 23-मई-1981 को हुआ। इनकी पत्नी का नाम सरला यादव है। शिवपाल सिंह यादव की एक पुत्री डॉ० अनुभा यादव तथा एक पुत्र आदित्य यादव है।

राजनीतिक जीवन

सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में वे बाल्यकाल से ही सक्रिय रहे। क्षेत्र में घूम-घूमकर मरीजों को अस्पताल पहुँचाना, थाना-कचहरी में गरीबों को न्याय दिलाने के लिए प्रयास करना व सोशलिस्ट पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेना उनका प्रिय शगल था। वे नेताजी के चुनावों में पर्चें बाँटने से लेकर बूथ-समन्वयक तक की जिम्मेदारी उठाते रहे। मधु लिमये, बाबू कपिलदेव, चौधरी चरण सिंह, जनेश्वर मिश्र जी जैसे बड़े नेताओं के आगमन पर उनकी सभा करवाने की भी जिम्मेदारी शिवपाल जी के ही कंधे पर होती थी। वे 1988 से 1991 और पुनः 1993 में जिला सहकारी बैंक, इटावा के अध्यक्ष चुने गये। 1995 से लेकर 1996 तक इटावा के जिला पंचायत अध्यक्ष भी रहे। इसी बीच 1994 से 1998 के अंतराल में उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के भी अध्यक्ष का दायित्व संभाला। तेरहवीं विधानसभा में इन्होंने जसवन्तनगर से विधानसभा का चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक मतों से जीत दर्ज की। इसी वर्ष वे समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव बनाये गये।

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उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने के लिए अनिर्वचनीय मेहनत की। पूरे उत्तर प्रदेश को कदमों से नाप दिया। उनकी लोकप्रियता और स्वीकार्यता बढ़ती चली गयी। प्रमुख महासचिव के रूप में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को नया आयाम दिया। प्रदेश अध्यक्ष रामशरण दास जी की अस्वस्थता को देखते हुए 01 नवम्बर, 2007 को मेरठ अधिवेशन में शिवपाल जी को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया। रामशरण दास जी के महाप्रयाण के पश्चात् 6 जनवरी, 2009 को वे पूर्णकालिक प्रदेश अध्यक्ष बने।

शिवपाल जी ने सपा को और अधिक प्रखर बनाया। नेताजी और जनेश्वर जी के मार्गदर्शन और उनकी अगुवाई में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित हुई। वे मई 2009 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे फिर उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल की भूमिका दी गई। बसपा की बहुमत की सरकार के समक्ष नेता विरोधी दल की जिम्मेदारी तलवार की धार पर चलने जैसा था। उन्होंने इस दायित्व को संभाला और विपक्ष तथा आम जनता के प्रतिकार के स्वर को ऊँचा रखा।

उन्होंने कई बार गिरफ्तारी दी, पुलिसिया उत्पीड़न को झेला, आम कार्यकर्ताओं के रक्षा कवच बने। यही कारण है कि सोलहवीं विधानसभा में समाजवादी पार्टी के चुनाव निशान पर साठ फीसदी से अधिक मतों से जीतने वाले वह एकमात्र विधायक हैं।

राजनीतिक यात्रा में नया मोड़

इस समय समाजवादी पार्टी के सैद्धांतिक विचलन व लोहिया, जनेश्वर व नेता जी के आदर्शों से भटकाव ने श्री शिवपाल यादव को निराश कर दिया। समाजवादी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी थी एवं लाखों प्रतिबद्ध मेहनती समाजवादी कार्यकर्ताओं को कुछ चाटुकारों, अवसरवादी एवं आधारहीन नेताओं के एवज में अपमानित एवं उपेक्षित किया जा रहा था। यहां तक की नेताजी का और स्वयं श्री शिवपाल यादव जी का भी समय-समय पर अपमान किया गया। श्री शिवपाल यादव पर इन लाखों समाजवादी समर्पित कार्यकर्ताओं का दबाव था, वे उन उपेक्षित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने के लिए एवं समाजवादी पार्टी की मूल विचारधारा की ओर वापस लौटने के लिए सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से लगातार आग्रह करते रहे। मगर सब कुछ व्यर्थ रहा। इसके बावजूद भी समाजवादी पार्टी को एकजुट रखने के लिए वे जो कुछ कर सकते थे, उन्होंने किया, लेकिन उनका सदा से यह मानना रहा था कि देश हित पार्टी व परिवार के हित से सर्वोपरि है। इन विपरीत परिस्थितियों में उनका सपा में कार्य करना असंभव हो चला था। ऐसे में 28 अगस्त 2018 को उन्होंने अपनी राहें अलग होने की घोषणा कर दी। श्री शिवपाल सिंह यादव अब प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रमुख व नेता हैं।

New twist in political journey

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